Amalaki Ekadashi Vrat Katha | आमलकी एकादशी कथा | Ekadashi Vrat Katha

Amalaki Ekadashi

फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहते हैं। आँवले के वृक्ष में भगवान का निवास होता है। इसलिए इस दिन आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान का पूजन किया जाता है।

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Amalaki Ekadashi Vrat Katha

Amalaki Ekadashi Vrat Katha

प्राचीन काल में भारत में चित्रसेन नाम का राजा था। उसके राज्य में एकादशी व्रत का प्रचलन था। राजा एवं प्रजा एकादशी का व्रत रखते थे।

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एक दिन राजा चित्रसेन शिकार खेलते-खेलते वन में बहुत दूर निकल गए। वहां जंगली जातियों ने उन पर आक्रमण कर दिया। उनके अस्त्रों शस्त्रों का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। यह देखकर जंगली चकित रह गए। देखते देखते जंगली जातियों के आदमियों की संख्या बढ़ गयी तो उनके आक्रमण से राजा चित्रसेन बेहोश होकर पृथ्वी पर गिर पड़े। पृथ्वी पर गिरते ही राजा के शरीर से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई जो समस्त राक्षसों का वध कर अदृश्य हो गयी।

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जब राजा को होश आया तो उन्हें सब राक्षसों के मृत शरीर पड़े दिखाई दिए। राजा आश्चर्य में पड़कर सोचने लगा की इन्हें किसने मारा है तभी आकाशवाणी हुई ये समस्त राक्षस तुम्हारे आमला एकादशी व्रत के प्रभाव के कारण मारे  गए हैं।

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यह सुनकर राजा बहुत प्रसन्न हुआ तथा अपने राज्य में उसने आमला एकादशी के व्रत का प्रचार किया।

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