Category: Samajik Kavita

Dussehra Par Kavita | Dussehra Par Poem | दशहरा पर कविता

Dussehra Par Poem Dussehra Par Kavita तर्ज – हमें और जीने की चाहत न होती    दो. नौ दुर्गा जब बीत गए और आयो दशहरा आज। आज ही रावण मारकर, किये राम ने पूरे काज।। रावण ने सीता गर चुराली न होती। दशहरा न होता, दिवाली न होती।।    ये भी पढ़े – देश भक्ति

नारी शक्ति पर कविता । Poem on women’s day | महिला दिवस पर कविता

poem on women’s day Naari Shakti Par Kavita तर्ज – हमें और जीने की चाहत न होती   दोहा – नारी की निंदा मत करो, नारी गुण की खान।          नारी  से पैदा  भये , कोई ध्रुव भक्त हनुमान।। वीर भक्त भारत के अन्दर न होते।  नारियाँ न होती, गर नारियाँ न

Samajik geet in hindi | Samajik kavita in hindi

Samajik Kavita Samajik Geet In Hindi तर्ज – क्या तुम्हें पता है ये गुलशन मेरे दिलवर…. फू. जिनकी कोई इज्जत ना हो, वो औरों की इज्जत क्या जानें। जो लूट – लूट कर खाते हैं, वो लोग शराफत क्या जानें।। (1) मानवता के किरदारों में, लाचार वो आज सिसकती है। बहनों की इज्जत तार तार,