Filmi Tarj Bhajan Lyrics | फ़िल्मी तर्ज भजन | गीता से बढ़कर के कोई भी ज्ञान नहीं है

Filmi Tarj Bhajan Lyrics

तर्ज – मेरे दिल की है आवाज 

दो. गीता ज्ञान की कुंजी है रामायण ग्रन्थ महान।
प्रत्यक्ष के लिये किसी को नहीं चहिये कोई प्रमाण।।

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गीता से बढ़कर के कोई भी ज्ञान नहीं है
रावण से बढ़कर के कोई विद्वान नहीं है
बाली से बढ़कर कोई बलवान नहीं है
कन्यादान से बढ़कर कोई दान नहीं है
माँ बाप से बढ़कर कोई भगवान नहीं है

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(1) अभिमान था समुन्दर को देवों से पड़े पाले
दानव देवों ने मिलकर 14 रत्न निकाले
समुन्दर मंथन करवायके अभिमान घटा घटा सब दिया
सब देव दनुज घबराये तब भोले ने विष पिया
भोले से बढ़कर कोई विषपान नहीं है…
श्रवण जैसी कोई संतान नहीं है…

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(2) जाओ ना बिन बुलाई समझाया था पति ने
पति की अवज्ञा करके दुःख सहा था सती ने
पिता के घर सती को पति की याद आई
अनादर सह न पाई तो अपनी जाँ गमाई
उस सती से बढ़कर कोई अपमान नहीं है….

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(3) संधि प्रस्ताव लेके श्री कृष्ण जी पधारे
दुर्योधन की सभा में बैठे थे योद्धा सारे
दुर्योधन ऐसे प्रण बोला प्रण से नहीं टुटूँगा
सुई की नोंक बराबर भूमि नहीं दूँगा
उस दुर्योधन से बड़ा कोई बेईमान नहीं है….

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(4) भारत के हम वासी इस वतन की कसमें खाते
इस मातृभूमि पै अपनी हँस – हँस के जाँ गवाते
इस मिट्टी से जन्मे भाल का चंदन है
गोपाल सदा करते भारत माँ को वन्दन है
राष्ट्रीय गान से बढ़कर कोई गान नहीं है…

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