गोवर्धन पूजा कब और क्यों मनाया जाता ? गोवर्धन पूजा विधि – विधान

govardhan puja kyu manaya jata hai

 


 

यह त्यौहार दीपावली के दूसरे दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कन्नी उंगली से उठाया था और सारे बृजवासियों की रक्षा की थी। गोवर्धन, आँगन मैं गोबर से मनाया जाता है। रात्रि के समय घर के मर्द पूजा करते हैं। दीपक जलाते हैं। टुंडी मैं दही या दूध भर देते हैं, और खील से दाँत बनाते हैं। चारों तरफ बाउन्ड्री बनाकर पीली सींक लगा देते हैं।
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Govardhan puja

 

एक लोटा पानी रखते हैं तथा 5 या 7 परिक्रमा लगाते हैं। इस दिन सुबह से ही अन्नकूट बनता है। बाजरा कूटकर भात बनता है। पूड़ी, पुआ, कड़ी, चावल, मीठे पुआ, मूँग साबुत,  मिक्स सब्जी जो बैंगन मूली  और सारी सब्जियां मिलाकर बनती है। गुजिया, मठरी, खीर, जितनी चीजें बन सके उतनी ही चीजों का भोग भगवान को लगाते हैं। भगवान के प्रसाद को बाँटते हैं। मन्दिरों मैं भी पूड़ी साग का प्रसाद बंटता ह%A

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