Mata Rani Bhajan Lyrics

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Mata Rani Bhajan

Mata Rani Bhajan Lyrics

तर्ज – हुजूर आते आते बहुत देर कर दी

 


 

 
शैर – तारदे माँ तारदे सब भक्तों को तारदे।
किस्ती फँसी मझधार मैं आकर पार करदे।।
दर्शन की मेरे मन में लगी है।
दर्शन तू दे जा माँ शेरावाली।।
(1) तुम्हारे दर पर कोई आया भिखारी
आ जाओ चढ़कर अम्बे शेर की सवारी
बिगड़ी बनादे कलकत्ते वाली …
(2) कहाँ पर मईया तूने देर लगाई
आकर के अम्बे माँ कर दो सहाई
भक्तों की नैया तू ही रखवाली…
(3) मैया को जो कोई प्रेम से ध्याये
उसकी भी नैया माँ पार लगाये
दुखियों के दुःख को हरने वाली…
(4) गोपाल मण्डल माँ तुमको मनाये
निशिदिन माँ तेरी ज्योति जलाये

शर्मा की झोली भरो मैया खाली …

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Mata rani ke bhajan lyrics

तर्ज – छोड़ेंगे ना हम तेरा साथ ओ साथी मरते दम तक

 


 

 
दो. मूरत तेरी देखकर माँ आया मुझको ध्यान।
नाम तेरे पर हो गया मैया मैं कुर्बान।।
कैसा है तेरा संसार माँ मुझे इतना बतादे
इतना बतादे धीर बधाँदे।
समझ न आये, तू समझादे ।। कैसा है तेरा संसार….
(1) एक घर से डोली निकलेगी एक से अर्थी जाये।
यहाँ खुशी शहनाई बाजे, उस घर मातम छाये।।
क्यों ना इनके भाग्य जगादे
समझ न आये तू समझादे….

 

(2) दीपक घर घर में जलते हैं फिर भी क्यों अंधियारी।
निर्धन के घर मातम छाया एक घर मने दिवारी।।
इनके दीपक क्यों न जलादे
समझ न आये तू समझादे…

(3) एक सोता है भूखा घर में इक घर में मौज उड़ाये।
माँ तेरी ये कैसी परीक्षा मेरी समझ न आये।।
दुखियों के दुःख क्यों न मिटादे
समझ न आये तू समझादे…

(4) जो सच्चाई पर चलता है चैन नहीं वो पाये।
साँची कहे सुने ना कोई, दुनिया हँसी उड़ाये।।
इन आँखो के परदे हटादे
समझ न आये तू समझादे…

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Mata rani bhajan lyrics in hindi

तर्ज – अगर कहीं पर रहते हो तो देना इस पर ध्यान
 
है माँ की ममता सबसे महान
अगर न होती माँ ममता जग में, तो होती न कोई जान
(1) सतयुग में सती माता ने, माँ की ममता जानी है।
बिना बुलाये पीहर जाने की, ठान ये अपनी ठानी है।।
माँ ममता के कारण माँ ने तज दये अपने प्राण…
(2) त्रेता में कोई लव और कुश ने माँ की ममता निहारी है।
इनकी कीरत से लिखी गई, रामायण अति प्यारी है।।
अश्वमेध का घोड़ा पकड़ा बुला लिये भगवान…
(3) द्वापर में देवकी जसुदा ममता मयी कहाई है।
इन सब देवों की दुर्गाशक्ति क्षमता मयी कहाई है।।
ममता की खातिर कर्णवीर ने दिया जान का दान…
(4) जिस माँ ने हमें जन्म दिया है उसका ऊँचा दर्जा है।
दूध नहीं हमें खून पिलाया उसी खून का कर्जा है।।
परषोत्तम कहते माँ की ममता जानें कोई इंसान…

 


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