Mata Rani Bhajan Lyrics | कैसा है तेरा संसार माँ मुझे इतना बतादे इतना बतादे धीर..

Mata Rani Bhajan Lyrics तर्ज – हुजूर आते आते बहुत देर कर दी  शैर – तारदे माँ तारदे सब भक्तों को तारदे। किस्ती फँसी मझधार मैं आकर पार करदे।। दर्शन की मेरे मन में लगी है। दर्शन तू दे जा माँ शेरावाली।। (1) तुम्हारे दर पर कोई आया भिखारी आ जाओ चढ़कर अम्बे शेर की

Ganesh vandana lyrics | सब करो वन्दना गणपति की मिलकर के जय जयकार करो

Ganesh Vandana तर्ज – तेरे पूजन को भगवान बना मन मन्दिर… जय जय गणपति जी महाराज प्रथम हम तुम्हें मनाते हैं। (1) गौरा जी तुम्हारी माता। महादेव पिता जगदाता।। सब देवों में सरताज , प्रथम हम तुम्हें मनाते हैं ये भी पढ़ें – विजया दशमी पर कविता (2) तुम मूसे की करौ सवारी। त्यारी महिमा जग

Aaj ka rashifal 24 may 2018 | आज का राशिफल 24 मई 2018 |

Aaj ka rashifal 24 may 2018 Aaj Ka Rashifal मेष राशि – आज का दिन प्रेम जीवन के लिए चुनौती पूर्ण रहेगा। आज आप स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही बिल्कुल ना बरतें। पैसा कमाने के लिए आज का दिन अच्छा रहने की सम्भावना है। आज घरेलू जीवन सुखी रहेगा। नौकरी में आज आपको मान सम्मान मिलेगा।

Aaj ka rashifal 23 may 2018 | आज का राशिफल 23 मई 2018

Aaj ka rashifal 23 may 2018 Aaj Ka Rashifal मेष राशि – आज का दिन घरेलू जीवन के लिए मिला जुला रहने वाला है। आज आपका स्वास्थ्य कुछ कमजोर रह सकता है। व्यापार में आपको विदेशी श्रोतो से अच्छा फायदा मिलने की सम्भावना है। प्रेम सम्बंधित मामलों के लिये  आज का दिन अच्छा रहेगा। आज

Aaj ka panchang 20 may 2018 | आज का पंचांग 20 मई 2018

Aaj Ka Panchang आज का पंचांग   दिनाँक – 20 मई 2018, दिन – रविवार, विक्रम संवत – 2075, शक संवत – 1940, अयन – उत्तरायण, ऋतु – ग्रीष्म, मास – अधिक ज्येष्ठ, पक्ष – शुक्ल, तिथि – षष्टी, नक्षत्र – पुष्य, योग – गण्ड, करण – कौलव, सूर्योदय – 05:32 बजे, सूर्यास्त – 19:04

Aaj ka panchang 19 may 2018 | आज का पंचांग 19 मई 2018

Aaj Ka Panchang  आज का पंचांग   दिनाँक – 19 मई 2018, दिन – शनिवार, विक्रम संवत – 2075, शक संवत – 1940, अयन – उत्तरायण, ऋतु – ग्रीष्म, मास – अधिक ज्येष्ठ, पक्ष – शुक्ल, तिथि – पंचमी, नक्षत्र – पुनर्वसु, योग – शूल, करण – बव, सूर्योदय – 05:32 बजे, सूर्यास्त – 19:03

Chetavani Bhajan Lyrics बीतींगी साल पै साल बुढापौ आवेगो, तू भजि गोविंद गोपाल

Chetavani Bhajan तर्ज – अब मैं मर मर के जीने लगा हूँ हंस एक दिन उड़ेगा अकेला, जीते जी का है झंझट झमेला।। हंस तेरा ये घर छोड़ देगा, सारे बंधन तेरे तोड़ देगा। कोई आये पवन का सा रेला…. (2) गुरु की महिमा न जाएगी वरनी, गुरु जाएगा अपनी ही करनी। अपनी करनी जायेगा