Safla Ekadashi 2019 | सफला एकादशी व्रत कथा | Saphala Ekadashi

Saphala Ekadashi

पौष माह की कृष्ण पक्ष की एकादशी को सफला एकादशी कहते हैं।
इसका व्रत करने से सारे कार्य सफल हो जाते हैं।
Safla Ekadashi Vrat Katha
इस व्रत को करने वाले को प्रातः स्नान करके भगवान अच्युत की आरती करनी चहिए।
भोग लगाना चहिए अगरबती नारियल सुपारी आँवला अनार तथा लौंग से पूजन करें।
दीपदान और रात्रि जागरण का बड़ा माहात्म्य है।

सफला एकादशी व्रत कथा

राजा महिष्मत के चार बेटे थे। छोटा बेटा ल्युक बड़ा दुष्ट और पापी था।वह पिता के धन को कुकर्मो में नष्ट करता रहता था।
दुःखी हो कर राजा ने उसे देश निकाला दिया। परन्तु उसकी लूटपाट की आदत न छूटी। एक बार उसे तीन दिन भोजन नसीब नहीं हुआ।

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वह भोजन की तलाश में एक साधु की कुटिया पर पहुंच गया। उस दिन सफला एकादशी थी।
महात्मा ने उसका मीठी वाणी से सत्कार किया तथा खाने के लिए भोजन दिया।

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महात्मा के इस व्यवहार से उसकी बुद्धि परवर्तित हो गई। उसने सोचा मै भी मनुष्य ही हूँ कितना दुराचारी और पापी।
वह साधु के चरणो पर गिर पड़ा। साधू ने उसे अपना चेला बना लिया।

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धीरे धीरे उसका चरित्र निर्मल होता गया।  अब उसमें कोई ऐब नहीं रहा।
वह महात्मा की आज्ञा से एकादशी का व्रत करने लगा।  जब वह बिलकुल बदल गया तो महात्मा ने उसके सामने अपना असली रूप प्रकट कर दिया।

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महात्मा के वेश में उसके सामने उसके पिता खड़े थे।  ल्युक ने राज काज संभाल कर आदर्श प्रस्तुत किया।
ल्यूक ने आजीवन सफला एकादशी का व्रत रखने का प्रण किया।

 

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