Samajik geet in hindi | Samajik kavita in hindi

Samajik geet in hindi, Samajik kavita in hindi
Samajik Kavita

Samajik Geet In Hindi

तर्ज – क्या तुम्हें पता है ये गुलशन मेरे दिलवर….


फू. जिनकी कोई इज्जत ना हो,
वो औरों की इज्जत क्या जानें।
जो लूट – लूट कर खाते हैं,
वो लोग शराफत क्या जानें।।
(1) मानवता के किरदारों में,
लाचार वो आज सिसकती है।
बहनों की इज्जत तार तार,
सड़कों पर पड़ी तड़फती है।।
जो खून बहाते सड़कों पर वो इंसान की कीमत क्या जानें…
(2) एक राम राज्य का भारत हो,
गाँधी का सपना तोड़ दिया।
जो गरिमा हिंदुस्तानी थी,
उस गरिमा को छोड़ दिया।।
मूरत को चुराते मंदिर से वो लोग इबादत क्या जानें…
(3) भारत माँ के लालों ने,
दामन को दागी कर डाला।
पूँजी थी मानवता भी जहाँ,
उसको भी बागी कर डाला।।
जो पलते रहे गुलामी में वो वीरों की शहादत क्या जानें…
(4) बेटों ने भरोसा तोड़ दिया,
ये भारत माता रोती है।
अब कौन बने गाँधी सुभाष,
ये धीरज अपना खोती है।।
खिच्चो खेले तूफानों से वो लोग कयामत क्या जानें…

Samajik Kavita In Hindi

तर्ज – सूनी – सूनी लगै रजधानी सरकार के बिना रे


ऐसौ पिता मरिजावै, जो घर में कलह करावै रे।
ऐसौ बेटा मरिजावै, नाम जो डुबाबै रे।।
(1) कुंती के जैसी मईया, काऊ की न होवै।
बेटा से मरायके बेटा, अन्त मैं जो रोवै।।
ऐसी बहिन मरिजावै-2 जो कुल की नाक कटावै रे…
(2) विभीषण सौ भईया देखो, कोई न पावै।
लंका की खातिर मैं जो, भेद सब बतावै।।
ऐसी पत्नी मरिजावै-2 जो गैर से नेह लगावै रे…
(3) ऐसी न भक्ति चाहिए, जामें भाव ना हो।
ऐसी ना जवानी चाहिए, जामें ताव ना हो।।
ऐसौ सिपाही मरिजावै-2 जो रण मैं पीठ दिखावै रे…
(4) रावन के जैसो कुटम्ब, काऊ कू मिलैना।
ऐसौ अत्याचारी पापी, प्रजा पै झिलैना।।
ऐसौ परषोत्तम मरिजावै-2 जो साँची न गावै रे…
                   ● Mata Rani Bhajan Lyrics
                   ● Ganesh Vandana Lyrics
                   ● Jawabi Bhajan Lyrics

Samajik Geet In Hindi

तर्ज – सूनी – सूनी लगै रजधानी सरकार के बिना रे



ऐसौ पिता मरिजावै, जो सुत को ना पढावै रे।
ऐसौ गुरु मरिजावै, जो ज्ञान कू छिपावै रे।।
(1) बाली सौ भईया काऊ कू मिलै ना दुबारा।
भईया की गर्दन पर चलावै दुधारा।।
ऐसी औरत मरिजावै-2 जो नाक कू कटावै रे…
(2) मीरा के जैसो पति काऊ कू मिलैना।
कंश सौ बेटा काऊ बाप पै झिलैना।।
खोटे कर्मन ते-2 अपने वंश को डुबाबै रे…
(3) ऐसौ नेता मरिजावै जो काऊ कू न भावै।
जनता की दौलत कू जो लूट-लूट खावै।।
ऐसौ यार मरिजावै-2 जो आरी चलावै रे…
(4) ऐसौ न पैसा चाहिए जो धूरि मैं मिलावै।
ऐसी न कंगाली चाहिए धुरि जो चटावै।।
ऐसौ किशन तो चाहिए-2 पार जो लगावै रे…
                 ● Samajik Geet In Hindi
                 ● Desh Bhakti Geet In Hindi
                 ● Yogini Ekadashi Vrat Katha
                 ● Nirjala Ekadashi Vrat Katha

Samajik kavita in hindi

तर्ज – दो दिल टूटे दो दिल हारे

दो. खत्म कर दो सिलसिला, अपने पश्चाताप का।
गौर करके देखिये, कोई खयाल है जो आपका।।
बेटा ही सब कुछ नहीं है, जिंदगी में अपनी छाप का।
युगों – युगों तक बेटियों ने, नाम किया है बाप का।।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ,
मोदी की बातों पर जरा गौर लाओ।
(1) ऋषि कात्यान के घर मैं, जन्मी थी बेटी कात्यायनी।
नौ दुर्गों मैं पूजी जाती, जन जन की देखो मोक्षदायिनी।।
बेटी से वंश को आगे बढ़ाओ…..
(2) नारी प्रधान देश की, कहती रामायण और गीता।
जनक नहीं जाने जाते, गर होती न उनके सीता।।
सीता के बलिदान को सुनो और सुनाओ…..
शैर – मेरे भारत देश में चल रहा एक अभियान।
बेटी को भी चाहिए अब अपना सम्मान।।
(3) शक्ति कौन बनती, फिर सर्वशक्तिमान की।
द्वापर मैं राधा सी बेटी, होती न वृषभान की।।
बेटी से जुड़ा है नाता सबको बताओ….
(4) इंदिरा सी बेटी देखो, पण्डित जवाहरलाल की।
विश्व में है नाम जिसका, कुर्वानी की मिशाल थी।।
गोपाल मण्डल का संदेशा घर – घर पहुँचाओ…


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