Satsang Bhajan Lyrics

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Satsang Bhajan

Satsang bhajan

तर्ज – अब मैं मर मर के जीने लगा हूँ

 


 

शैर – तेरा दीवाना हूँ मैं सांवरे कैसे कह दू कि तुझसे प्यार ना।
      कुछ सरारत तेरी नजर की भी है, मैं अकेला गुनेगार ना।।
      तू  याद   करे  ना  करे,   इसका  मुझे  कोई  गम  नहीं।
    तेरी याद न करने की अदा है, याद करने से कम नहीं।।
       बाँकी के संग मैं बाँके बिहारी।
      जुगल जोड़ी लगे प्यारी प्यारी।।
(1) मुकुट माथे पै गल मैं है माला।
      कानन कुण्डल बड़ा झलकाला।।
      वंशी अधरों पै गुण तीन वारी…
(2) पट पीताम्बर कारी कमरिया।
      दुनियाँ तुझ पै बलहारी सांवरिया।।
      बलिहारी मैं भानु की दुलारी…
(3) राधा गोरी है कारे कन्हैया।
      डाल पड़े प्यारे गल बईया।।
      मन के मंदिर में मुरत तिहारी…
(4) रूप त्यारा ये चम चम चमके।
      रसकों के दिल मैं दम दम दमके।।

तर्ज – क्या मिलिऐ ऐसे लोगों जिनकी फितरत छुपी रहे

 


 

दो. संत समाज बैठी यहाँ, और सज्जन लोग तमाम।
बड़े बुजर्ग माँ बहनों को, मेरा बारम्बार प्रणाम।।
आदरणीय अध्यक्ष महोदय, और कुशल संचालक जी।
मेरी भूल चूक करना क्षमा, मुझे जानके निज बालक जी।।
नहाये धोये तो क्या हुआ, रहयो मन मैं मैल समाय।
मीन सदा जल में रहे, जाकी तौऊ वास न जाय।।
मन का मैल मिटा न सको तो, तन की सफाई मत करना।
अपने दिल में झाँके बिना, गैरों की बुराई मत करना।।
 
(1) सतयुग में एक भक्त प्रहलाद ने, मन का मैल मिटाया था।
प्रगट भये पत्थर से भगवन, नर सिंह रूप दिखाया था।।
हिरणाकश्यप जैसी अपनी झूठी बड़ाई मत करना…
(2) त्रेता मैं श्री रामचन्द्र ने, मन में बात बिचारी थी।
पग रज लग पत्थर से प्रगटी गौतम ऋषि की नारी थी।।
बुरे कार्य मैं कभी किसी की, जरा सहाई मत करना…
(3) द्वापर में धृतराष्ट्र ने दिल के अन्दर देखा ना।
साड़ी खिंच रही द्रोपदी की, नृप को हुआ परेखा ना।।
बेटा कितना भी हो प्यारा, पर ऐसी भलाई मत करना…
(4) मन मैला तन उज्वल मेरा, बगुला कपटी अंग हुआ।
इससे तो कऊआ भला तन मन एक ही रंग हुआ।।

अरे परषोत्तम भजन बिना, तू जगत हंसाई मत करना…

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Satsang bhajan lyrics

तर्ज – अब मैं मर मर के जीने लगा हूँ

 


 

 
दो. चार वेद छः शास्त्र में बात लिखी है एक।
प्रेम करो हर जीव से प्रेम है सबसे नेक।।
बात लेखों मैं हमने पढ़ी है,
प्रभु की भक्ति में शक्ति बड़ी है।
अच्छे काम में प्रभु जी के नाम मैं,
हमेशा मुसीबत खड़ी है।।
(1) सतयुग में हरिश्चन्द्र दानी,
बेटा रोहित और तारा रानी।
पहुंचे काशी में जाकर देखो,
सत की खातिर बिके तीनों प्राणी।।
सत की नौका कभी ना अड़ी है….
(2) त्रेता में वो गौतम की नारी,
देखो अहिल्या बिचारी।
पत्थर बन के पड़ी थी डगर में,
पग रज से प्रभु ने है तारी।।
नारी बनके चरण पड़ी है…..
(3) द्वापर में विदुर भक्त भाये,
श्याम उनकी कुटिया पर आये।
विदुराणी के प्रेम बन्धन से,
केला के छिलका प्रभु ने है खाये।।
भाव भक्ति की जोरों लड़ी है….
(4) नाम कलियुग में आधार होगा,
भाव से लेके नर पार होगा।
भाव के बिन कुछ भी नहीं है,
भाव ही बस एक सार होगा।।

परषोत्तम परीक्षा कड़ी है…

मन मोहन मदन गोपाल।
मेरी ज्ञान यज्ञ में आय जइयो।।
(1) यहाँ ज्ञान की बह रही गंगा है।
सबकौ मन है रहयो चंगा है।।
मेटौ आय के जंजाल…
(2) सब कह रहे यहाँ पै नर नारी।
अब आ जाओ तुम बनवारी।।
और आयके करौ निहाल….
शैर – भक्ति में भावना की कोई ज्योति जलाके देखिये।
और आ जाते हैं भगवान भाव से बुलाके देखिये।।
(3) त्यारी सूरत पर आयौ मनुआ।
तुम्हें भक्त टेरते हैं कनुआ।।
और मुरली को दिखाओ कमाल…
शैर – त्यारी सूरत पर साँवरिया अच्छे अच्छे मर जाते हैं।
गर कृपा आपकी हो जाये तो पापी भी तर जाते हैं।।
(4) त्यारी सूरत बस रही अखियाँ न मैं।
मैं सो ना पाऊ रतियन मैं।।
परषोत्तम के प्रतिपाल…

 


 

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